📕 हिंदी के प्रथम कवि कौन थे?
👍सिद्ध सरहपा
Explanation : हिंदी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे। उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और वे पालशासक धर्मपाल (770-810 ई.) के समकालीन थे। इसका जन्मकाल आठवीं शती माना जाता है। आदिकाल के सिद्ध कवियों में इनका प्रमुख स्थान है। इनके अन्य नाम सरहपाद, राहुल भद्र, सरोजवज्र भी मिलते हैं। सरहपा को बौद्ध धर्म का वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक माना जाता है। हरिभद्र नामक प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक के यह शिष्य थे। सरहपा पहले कवि हैं, जिन्होंने सामाजिक पाखंड और आडंबरों का जमकर विरोध किया और गुरु को महत्व दिया। सरहपा के लिखे हुए 32 ग्रंथ माने जाते हैं। किंतु इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति 'दोहाकोश' है।
📕 हिंदी की प्रथम कहानी कौन सी है?
👍रानी केतकी की कहानी
Explanation : हिंदी की प्रथम कहानी 'रानी केतकी की कहानी' है। जिसकी रचना सैयद इंशाअल्ला खाँ ने की और इसका रचनाकाल वर्ष 1803 या वर्ष 1808 माना जाता है। 'रानी केतकी की कहानी' में रानी केतकी और कुँवर उदयभान की प्रेमकथा का वर्णन है। कहानी कुल 20 शीर्षकों में लिखी गई है। कहानी का आरंभ 'कहानी के जोबन का उभार और बोल चाल की दुलहिन का सिंगार' शीर्षक से हुआ है। कहानी में कुल 8 पद है। जिन्हें 'दोहे अपनी बोली के' कहा गया है। कहानी की भाषा मुहावरेदार, चटकीली और चलती फिरती है। कहानी के आरंभ करने के तरीके को आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने किसी महफिल में घोड़ा कुदाते हुए आने वाले लखनऊ के भाँड़ों की तरह माना है। वर्ष 1756 में मुर्शिदाबाद में जन्मे इंशाअल्ला खाँ उर्दू फारसी के प्रतिभाशाली विद्वान् और शायर थे। इंशा हिंदी खड़ीबोली गद्य के उन्नायक और उसके विकास में खास सहयोगी रहे थे। इन्होंने अनेक महत्वपूर्ण उर्दू, फारसी कृतियों की रचना की, किंतु इनकी सर्वाधिक ख्याति का आधार इनके द्वारा हिंदी की प्रथम कहानी 'रानी केतकी की कहानी' का लिखा जाना है।
📕 हिंदी का प्रथम एकांकी कौन सा है?
👍 एक घूँट
Explanation : हिंदी का प्रथम एकांकी 'एक घूँट' को माना जाता है। जिसके लेखक जयशंकर प्रसाद है। इसका प्रकाशन वर्ष 1929 में हुआ। इसके प्रमुख पात्र आनंद और प्रेमलता हैं। काल्पनिक पात्रों का सहारा लेकर इस एकांकी में बड़ी ही सरल शैली में दो प्रश्न उठाए गए हैं–जीवन क्या है और जीवन कैसे जीना चाहिए। वहीं हरिचंद्र वर्मा ने हिंदी का प्रथम एकांकी रामकुमार वर्मा कृत बादल की मृत्यु (1930) को माना है!
📕 हिंदी का प्रथम उपन्यास कौन सा है?
👍 परीक्षा गुरू
Explanation : हिंदी का प्रथम उपन्यास 'परीक्षा गुरू' है।जिसकी रचना भारतेन्दु युग के प्रसिद्ध नाटककार लाला श्रीनिवास दास ने 25 नवम्बर,1882 को की थी।लाला श्रीनिवास कुशल महाजन और व्यापारी थे। अपने इस उपन्यास में उन्होंने मदनमोहन नामक एक रईस के पतन और फिर सुधार की कहानी सुनाई है। मदनमोहन एक समृद्ध वैश्व परिवार में पैदा होता है, पर बचपन में अच्छी शिक्षा और उचित मार्गदर्शन न मिलने के कारण और युवावस्था में गलत संगति में पड़कर अपनी सारी दौलत खो बैठता है। न ही उसे आदमी की ही परख है। वह अपने सच्चे हितैषी ब्रजकिशोर को अपने से दूर करके चुन्नीलाल, शंभूदयाल, बैजनाथ और पुरुषोत्तम दास जैसे कपटी, लालची, मौका परस्त, खुशामदी "दोस्तों" से अपने आपको घिरा रखता है। बहुत जल्द इनकी गलत सलाहों के चक्कर में मदनमोहन भारी कर्ज में भी डूब जाता है और कर्ज समय पर अदा न कर पाने से उसे अल्प समय के लिए कारावास भी हो जाता है । इस कठिन स्थिति में उसका सच्चा मित्र ब्रजकिशोर, जो एक वकील है, उसकी मदद करता है और उसकी खोई हुई संपत्ति उसे वापस दिलाता है। इतना ही नहीं, मदनमोहन को सही उपदेश देकर उसे अपनी गलतियों का एहसास भी कराता है।
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